जानें गुरु ग्रह का हमारे जीवन क्या हैं प्रभाव ?

बृहस्पति को हमारे शास्त्रों में देवगुरु का दर्जा प्राप्त है। गुरु ज्योतिष के नव ग्रहों में सबसे अधिक शुभ ग्रह माने जाते हैं.  सफलता के पीछे सकारात्मक उर्जा का होना अहम होता है और यही काम गुरु करते हैं. उनको सभी ग्रहों में सर्वोपरि मानते हुए उनकी पूजा की जाती है। इस वजह से इसे पूर्ण रूप से सात्विक ग्रह भी कहा गया है। 

 

कुंडली में अगर गुरु मजबूत हो तो-
गुरु जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक उर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं. अपने सकारात्मक रुख के चलते व्यक्ति कठिन से कठिन समय को आसानी से सुलझा लेता है. गुरु आशावादी बनाते हैं और निराशा को जीवन में प्रवेश नहीं करने देते. और जब सफलता मिलती रहती है तब जिंदगी में खुशहाली भी आ जाती है.जीवन में हर क्षेत्र में सफलता के पीछे गुरु ग्रह की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. कुंडली में अगर गुरु मजबूत हो तो सफलता का कदम चूमना बिल्कुल तय है.

 

कुंडली में अगर गुरु अगर कमजोर हो तो-
 गुरु अगर कमजोर हो तो तमाम मुश्किलें जीना मुहाल कर देती है. बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं, किसी काम में यश नहीं मिलता, घर में पैसे की तंगी बनी रहती है और स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखने लगता है. ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि अगर आपकी कुंडली में गुरु कमजोर है तो उसे मजबूत कैसे करें और कैसे घर में खुशहाली लाएं.


गुरु के प्रबल प्रभाव वाले जातक-
गुरु के प्रबल प्रभाव वाले जातकों की वित्तिय स्थिति मजबूत होती है तथा आम तौर पर इन्हें अपने जीवन काल में किसी गंभीर वित्तिय संकट का सामना नहीं करना पड़ता. ऐसे जातक सामान्यतया विनोदी स्वभाव के होते हैं तथा जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में इनका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है. ऐसे जातक अपने जीवन में आने वाले कठिन समयों में भी अधिक विचलित नहीं होते तथा अपने सकारात्मक रुख के कारण इन कठिन समयों में से भी अपेक्षाकृत आसानी से निकल जाते हैं. ऐसे जातक आशावादी होते हैं तथा निराशा का आम तौर पर इनके जीवन में लंबी अवधि के लिए प्रवेश नहीं होता जिसके कारण ऐसे जातक अपने जीवन के प्रत्येक पल का पूर्ण आनंद उठाने में सक्षम होते हैं. ऐसे जातकों के अपने आस-पास के लोगों के साथ मधुर संबंध होते हैं तथा आवश्यकता के समय वे अपने प्रियजनों की हर संभव प्रकार से सहायता करते हैं. इनके आभा मंडल से एक विशेष तेज निकलता है जो इनके आस-पास के लोगों को इनके साथ संबंध बनाने के लिए तथा इनकी संगत में रहने के लिए प्रेरित करता है. आध्यात्मिक पथ पर भी ऐसे जातक अपेक्षाकृत शीघ्रता से ही परिणाम प्राप्त कर लेने में सक्षम होते हैं.

गुरु के बारे में कुछ तथ्य
1. गुरु वृहस्पति लग्न मे बैठा हो , तो बली होता है और यदि चन्द्रमा के साथ कही   बैठा हो तो चेष्ठाबली होता है.
2. गुरु वृहस्पति को शुभ ग्रह माना गया है.
3. गुरु वृहस्पति धनु एवं मीन राशि का स्वामी है.
4 . एक राशि मे गुरु वृहस्पति 13 मास तक निवास करता है. सूर्य, चन्द्र और मंगल मित्र है, बुध, शुक्र शत्रु है तथा शनि, राहु, केतु समग्रह है. 6. गुरु वृहस्पति बुद्धि तथा उत्तम वाकशक्ति के स्वामी है.
5. गुरु वृहस्पति विशाखा, पुनर्वसु तथा पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी है.
6 . गुरु वृहस्पति को प्रसन्न करना है , तो ब्रह्माजी की पूजा करनी चाहिए.

 

गुरु से संबन्धित कार्य क्षेत्र कौन से हैं
गुरु जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक उर्जा प्रदान करने में सहायक हैं. अपने सकारात्मक रुख के कारण व्यक्ति कठिन से कठिन समय को आसानी से सुलझाने के प्रयास में लगा रहता है. गुरु आशावादी बनाते हैं और निराशा को जीवन में प्रवेश नहीं करने देते हैं. गुरु के अच्छे प्रभाव स्वरुप जातक परिवार को साथ में लेकर चलने की चाह रखने वाला होता है. गुरु के प्रभाव से व्यक्ति को बैंक, आयकर, खंजाची, राजस्व, मंदिर, धर्मार्थ संस्थाएं, कानूनी क्षेत्र, जज, न्यायालय, वकील, सम्पादक, प्राचार्य, शिक्षाविद, शेयर बाजार, पूंजीपति, दार्शनिक, ज्योतिषी, वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता होता है.

गुरु के मित्र ग्रह 
सूर्य, चन्द्र, मंगल हैं. गुरु के शत्रु ग्रह बुध, शुक्र हैं, गुरु के साथ शनि सम संबन्ध रखता है. गुरु को मीन व धनु राशि का स्वामित्व प्राप्त है. गुरु की मूलत्रिकोण राशि धनु है. इस राशि में गुरु 0 अंश से 10 अंश के मध्य अपने मूलत्रिकोण अंशों पर होते हैं. गुरु कर्क राशि में 5 अंश पर होने पर अपनी उच्च राशि अंशों पर होते हैं. गुरु मकर राशि में 5 अंशों पर नीच राशिस्थ होते हैं, गुरु को पुरुष प्रधान ग्रह कहा गया है यह उत्तर-पूर्व दिशा के कारक ग्रह हैं. गुरु के सभी शुभ फल प्राप्त करने के लिए पुखराज रत्न धारण किया जाता है. गुरु का शुभ रंग पिताम्बरी पीला है. गुरु के शुभ अंक 3, 12, 21 है. गुरु के अधिदेवता इन्द्र, शिव, ब्रह्मा, भगवान नारायण है.

गुरु का बीज मंत्र

ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:

गुरु का वैदिक मंत्र

देवानां च ऋषिणा च गुर्रु कान्चन सन्निभम।

बुद्यिभूतं त्रिलोकेश तं गुरुं प्रण्माम्यहम।।

गुरु की शुभता प्राप्त करने के लिए  दान करने की  वस्तुएं
गुरु की शुभता प्राप्त करने के लिए निम्न वस्तुओं का दान करना चाहिए. स्वर्ण, पुखराज, रुबी, चना दान, नमक, हल्दी, पीले चावल, पीले फूल या पीले लडडू. इन वस्तुओं का दान वीरवार की शाम को करना शुभ रहता है. गुरु का जातक पर प्रभाव

बृहस्पति- गुरु ग्रह का शुभ प्रभाव बढ़ाने  के कुछ उपाय -
दान-द्रव्य: पुखराज, सोना, कांसी, चने की दाल, खांड, घी, पीला कपड़ा, पीला फूल, हल्दी, पुस्तक, घोड़ा, पीला फल दान करना चाहिए.
वृहस्पतिवार व्रत करना चाहिए.
रुद्राभिषेक करना चाहिए.
पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करें.
गुढ़हल के फूल को देवताओं को अर्पित करें
केसर का दान करें.
गरीबों को दही चावल खिलाने से वृहस्पत का बुरा फल समाप्त होता है.
गुरु और शिक्षकों की सेवा से भी वृहस्पति अच्छा होता है.
माता-पिता व बुजुर्गो और पितरों का ध्यान रखने वाले लोगों का वृहस्पत हमेशा बेहतर फल देता है.
जिस दिन गुरु-पुष्य या पुनर्वसु नक्षत्र हो उस दिन नारायण भगवान,

गुरु व माता पिता की सेवा ज़रूर करनी चाहिए .